Aaj Ka Panchang 11 August 2026: Sawan Shivratri, Chaturdashi, Shubh Muhurat & Rahu Kaal

Direct Answer: 11 अगस्त 2026, मंगलवार को श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी है। इस दिन सावन शिवरात्रि / मासिक शिवरात्रि और दूसरा मंगला गौरी व्रत भी पड़ रहा है। राजस्थान के एक स्थान-आधारित पंचांग संदर्भ में चतुर्दशी 12 अगस्त को रात 1:52 बजे तक, पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 10:09 बजे तक और सिद्धि योग शाम 6:51 बजे तक है। शहर बदलने पर सूर्योदय, राहु काल और दूसरे मुहूर्तों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
आज का दिन शिव और शक्ति—दोनों की उपासना से जुड़ा है। सुबह सरल शिव पूजन, दिन में संयमित दिनचर्या और शाम/रात्रि में शिवरात्रि का जप-ध्यान किया जा सकता है।
11 अगस्त 2026 का पंचांग: एक नजर में
- दिन: मंगलवार
- मास: श्रावण / सावन
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: चतुर्दशी — लगभग 1:52 AM, 12 अगस्त तक (राजस्थान संदर्भ)
- नक्षत्र: पुनर्वसु — लगभग 10:09 AM तक
- योग: सिद्धि — लगभग 6:51 PM तक
- मुख्य अवसर: सावन शिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि, दूसरा मंगला गौरी व्रत
आज के शुभ और अशुभ समय
नीचे दिए गए समय राजस्थान के स्थान-आधारित पंचांग संदर्भ पर आधारित हैं। अपने शहर के लिए local Panchang में कुछ मिनट का अंतर संभव है।
- ब्रह्म मुहूर्त: 4:33 AM से 5:16 AM
- अमृत काल: 7:59 AM से 9:25 AM
- अभिजीत मुहूर्त: 12:11 PM से 1:04 PM
- विजय मुहूर्त: 2:50 PM से 3:44 PM
- राहु काल: 3:57 PM से 5:37 PM
- निशिता मुहूर्त: 12:16 AM से 12:59 AM, 12 अगस्त
जरूरी नोट: राहु काल में सामान्यतः नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है। नियमित पूजा, नाम-जप या पहले से चल रहे कार्यों पर यह नियम उसी तरह लागू नहीं माना जाता। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या अन्य बड़े मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग जरूर देखें।
सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 क्यों खास है?
सावन मास की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को कई भक्त विशेष श्रद्धा से मनाते हैं। इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना, बेलपत्र चढ़ाना, “ॐ नमः शिवाय” का जप करना और रात्रि में शांत मन से ध्यान करना लोकप्रिय परंपराएं हैं। विस्तृत पूजा, जलाभिषेक और व्रत नियम के लिए हमारा Sawan Shivratri 2026 Puja Vidhi & Jalabhishek Guide पढ़ें।
सरल शिव पूजा विधि
- स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और पूजा का संकल्प लें।
- दीपक जलाकर भगवान गणेश और शिव-पार्वती का स्मरण करें।
- शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें।
- बेलपत्र, चंदन, फूल और अपनी क्षमता के अनुसार फल या प्रसाद चढ़ाएं।
- 11, 21 या 108 बार “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
- शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र या शिव आरती में से जो सहज लगे, करें।
- रात्रि में कुछ समय मौन, ध्यान या शिव नाम-जप के लिए रखें।
आज दूसरा मंगला गौरी व्रत भी है
उत्तर भारतीय श्रावण परंपरा में 11 अगस्त 2026 को दूसरा मंगला गौरी व्रत है। यह माता गौरी की पूजा से जुड़ा मंगलवार का व्रत है। क्षेत्रीय कैलेंडर अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने परिवार या स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता दें। आज के लिए हमने अलग से Second Mangala Gauri Vrat 2026 Puja Vidhi guide भी तैयार किया है।
आज क्या करें?
- सुबह कुछ मिनट शिव मंत्र जप या ध्यान करें।
- जल, दूध या पूजा सामग्री की अनावश्यक बर्बादी न करें।
- व्रत रखें तो अपनी स्वास्थ्य क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।
- क्रोध, अपशब्द और विवाद से बचने का प्रयास करें।
- जरूरतमंद को भोजन, पानी या उपयोगी वस्तु देना दिन को सार्थक बना सकता है।
कल 12 अगस्त 2026 को क्या है?
12 अगस्त को हरियाली अमावस्या और सूर्य ग्रहण से जुड़े कई search queries रहेंगी। धार्मिक जानकारी के लिए हमारा Hariyali Amavasya 2026 Guide और भारत में ग्रहण की दृश्यता/सूतक समझने के लिए Surya Grahan 12 August 2026 India Guide पढ़ सकते हैं।
कल के क्रम को समझने के लिए पिछले दिन का Aaj Ka Panchang 10 August 2026 भी उपलब्ध है।
FAQ: 11 अगस्त 2026 पंचांग
11 अगस्त 2026 को कौन सी तिथि है?
श्रावण कृष्ण पक्ष चतुर्दशी है, जो राजस्थान संदर्भ में 12 अगस्त रात लगभग 1:52 बजे तक रहती है।
क्या 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि है?
हाँ, इस दिन सावन शिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि दोनों का उल्लेख पंचांग में है।
क्या 11 अगस्त को मंगला गौरी व्रत है?
हाँ, उत्तर भारतीय श्रावण परंपरा में यह दूसरा मंगला गौरी व्रत है। क्षेत्रीय कैलेंडर अलग हो सकते हैं।
आज राहु काल कब है?
राजस्थान के स्थान-आधारित संदर्भ में लगभग 3:57 PM से 5:37 PM है। अपने शहर का local time verify करें।
शिवरात्रि पर सबसे सरल मंत्र कौन सा है?
“ॐ नमः शिवाय” सबसे सरल और व्यापक रूप से जपा जाने वाला शिव मंत्र है।
क्या बिना उपवास के पूजा की जा सकती है?
हाँ। स्वास्थ्य या अन्य कारणों से व्रत न रख सकें तो भी श्रद्धा से जल अर्पित, दीपक और मंत्र जप कर सकते हैं।
नोट: पंचांग समय स्थान के अनुसार बदलते हैं और धार्मिक परंपराएं क्षेत्र व परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं। यह लेख सामान्य devotional guidance के लिए है।





